मैं मरा नहीं हूँ मैं मरा नहीं हूँ
बाहों में खुद को छुपा लेती है और मन में सोचती है -सच में बहुत ही डरावना सपना था। बाहों में खुद को छुपा लेती है और मन में सोचती है -सच में बहुत ही डरावना सपना था।
तू जितनी सुन्दर माँ है क्या मैं भी वो बन पाऊँगी ? तू जितनी सुन्दर माँ है क्या मैं भी वो बन पाऊँगी ?
कौन सा सपना था, पर था अजीब सा, याद भी तो नही आ रहा, और ये कुत्ते चुप क्यो नही होते। कौन सा सपना था, पर था अजीब सा, याद भी तो नही आ रहा, और ये कुत्ते चुप क्यो नही हो...
लेखक : इवान बूनिन अनुवाद : आ. चारुमति रामदास लेखक : इवान बूनिन अनुवाद : आ. चारुमति रामदास
भावशून्यता का भविष्य, समाज का यह विकृत रूप, भयावह ? भावशून्यता का भविष्य, समाज का यह विकृत रूप, भयावह ?